"शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है| बालक आजीवन परिवार से, समाज से, पास-पडौस से तथा अपने गुरुजनों से चलना-फिरना, खाना-पीना, बोलना-चालना तथा अन्य दैनिक क्रिया-कलापों को सीखता है|
केंद्रीय विद्यालय का उद्देश्य भी बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है| इसके लिए विद्यालय में शैक्षिक, नैतिक, शारीरिक, साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है| जिसमें पाठ्यक्रमीय एवं सह-पाठ्यक्रमीय क्रियाओं में सहभागिता अत्यंत आवश्यक है|
यदि वयोवृद्ध, ज्ञानवृद, अनुभववृद्ध माता-पिता एवं शिक्षक युगीन परिवेश को ध्यान में रखते हुए वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति की कामना करें तथा स्वयं सदाचरण प्रस्तुत करें तो निश्चितरूप से छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा|"
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ|